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भाजपा के नए अध्यक्ष की नियुक्ति में हो रही देरी के पीछे ‘पार्टी का अपना संविधान’ भी…

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया में काफी देरी हो चुकी है। इसके पीछे तमाम राजनैतिक कारणों के अलावा पार्टी का अपना संविधान है। इसमें जिस तरह के नियम दिए गए है उसका पालन होने के बाद ही नियुक्ति होना संभव होता है। भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी संभव होता है जब पार्टी के कम से कम 19 राज्यों में अध्यक्ष नियुक्त हो चुके हों। अभी तक पार्टी ने 37 में से 14 राज्यों में नए अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। बाकी राज्यों जैसे कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में भी जल्द ही नियुक्तियां की जाएंगी। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि 18 राज्यों में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है। अगले कुछ हफ्तों में 19 राज्यों का आंकड़ा पूरा हो जाएगा।
भाजपा के संविधान में सभी स्तरों पर प्रमुखों के चुनाव के लिए एक ही फॉर्मूला तय किया गया है। आधे बूथ अध्यक्षों के चुनाव खत्म होने के बाद, मंडल प्रमुख का चुनाव होता है। आधे मंडल अध्यक्षों के चुनाव के बाद, जिला प्रमुखों के लिए रास्ता साफ हो जाता है। जब आधे जिला इकाई अध्यक्षों का चुनाव हो जाता है, तो प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जा सकती है। 37 राज्यों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्षों के ऐलान के बाद पार्टी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की ओर बढ़ती है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच फिलहाल किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनी है। हालांकि, भगवा पार्टी के सूत्र का कहना है कि जल्द ही इस पर आम सहमति बनने की संभावना है।पार्टी और संघ के बीच सहमति बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे चयन में थोड़ी देरी हुई। उम्मीदवार की उम्र, समाजिक पृष्ठभूमि और भौगोलिक क्षेत्र को ध्यान में रखा जा रहा है। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जा रही है। कुछ नाम जो चर्चा में हैं वे वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं, इसलिए कैबिनेट में संभावित फेरबदल की भी बात की जा रही है।
पीएम की विदेश यात्रा के बाद ऐलान संभव
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुलाई के दूसरे सप्ताह में विदेश यात्रा से लौटने के बाद पार्टी नए अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है। पार्टी ने इस बीच महाराष्ट्र, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं। भाजपा के नए अध्यक्ष के सामने कई चुनावी चुनौतियां होंगी। नए अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी को आगामी चुनावों का सामना करना है, जिनमें 2025 में ही होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव। सके बाद 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम विधानसभा चुनाव शामिल है।
Deepu Choubey
Author: Deepu Choubey

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